पुस्तकालय विज्ञान के पांच सूत्रों का समींक्षात्मक अध्ययन : एक समकालीन परिप्रेक्ष्य

Authors

  • Lukesh Kumar Mirche Assistant Professor, MATS University, Raipur, Chhattisgarh
  • Dr. Sahityanjali Chandra Assistant Professor, MATS University, Raipur, Chhattisgarh
  • Pramod Kumar Ray LIS Professional, Raipur, Chhattisgarh

Keywords:

आधुनिक पुस्तकालय, डिजिटल युग, पुस्तकायल विज्ञान के पांच सूत्र

Abstract

आज का समय परिवर्तन का समय का है, समय जैसे-जैसे आगे बढ़ता जाता है वैसे-वैसे नए-नए चीजों का आविष्कार और सद्धांतो का उदय होता है। आज भारतीय पुस्तकालयों में क्रांतिकरी परिवर्तन हुए है, और इस परिवर्तन का मुख्य कारण पुस्तकालय विज्ञान के पांच नियम है, जिसको भारतीय पुस्तकालय विज्ञान के जनक डॉ. एस. आर. रंगनाथन ने दिया है। यह सिद्धांत शुरू से ही बहुत प्रभावशाली रहा है और अनेक विद्वानों ने समय और मांग के हिसाब से इसमें परिवर्तन किये है, इस शोध में पुस्तकालय विज्ञान के पांच नियमों का समींक्षात्मक अध्ययन किया गया है। इस अध्ययन विधि के रूप में गुणात्मक और द्वितीयक सूचना स्रोतों का उपयोग किया गया है, जिसके माध्यम से पुस्तकालय विज्ञान के पांच सूत्रों का पुस्तकालयों में कितना प्रभाव पड़ा है, इसका अध्ययन किया गया है। क्यांेकि आज के आधुनिक परिवेश में इन नियमों के साथ पुस्तकालयों का समन्वय आवश्यक है। 

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Published

2026-07-25

How to Cite

Mirche, L. K., Chandra , S. ., & Ray, P. . (2026). पुस्तकालय विज्ञान के पांच सूत्रों का समींक्षात्मक अध्ययन : एक समकालीन परिप्रेक्ष्य . AGPE THE ROYAL GONDWANA RESEARCH JOURNAL OF HISTORY, SCIENCE, ECONOMIC, POLITICAL AND SOCIAL SCIENCE, 7(7), 15–23. Retrieved from https://mail.agpegondwanajournal.co.in/index.php/agpe/article/view/495